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चक्रवात -प्राकृतिक आपदा

 चक्रवात प्राकृतिक आपदा के बारे में जाने जब उड़ीसा राज्य में 5 जिलों को बुरी तरह से तबाह किया था।

       



  तीव्र चक्रवाती तूफान का खतरा भारत के पूर्वी समुद्री तट पर स्थित उड़ीसा राज्य में बंगाल की खाड़ी से बना रहता है उड़ीसा राज्य के 5 जिले 17-18 अक्टूबर के 1999 को इस चक्रवात से बुरी तरह से प्रभावित हुए और पुणे 25 अक्टूबर 1999 को पूर्वी पोर्ट ब्लेयर के निकट थाईलैंड की खाड़ी में अभाव के कारण चक्रवात उत्पन्न हुआ था जो धीरे-धीरे उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते चला अत्यंत यह चक्रवात का रूप धारण कर लिया और 29 अक्टूबर 1999 की सुबह उड़ीसा के समुद्र के बीच के क्षेत्र में प्रभावित हो गया इस चक्रवात ने अपनी बीबीसी का से राज्य में काफी तबाही मचाई। इस समय लगभग 36 घंटे तक 260 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पवन चलती रही। टी ब्रेक वाली इस पवन ने ना सिर्फ बड़े-बड़े पेड़ों को उखाड़ फेंका बल्कि कच्चे खपरैल के घर के अलावा औद्योगिक भवनों को भी काफी क्षति पहुंचाई इसलिए विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ दूर भाषा सेवाओं की बुरी तरह से प्रभावित कर दी इस चक्रवात के फल स्वरुप 3 दिन लगातार भारी वर्षा होती रही इस भारी वर्षा ने जवानी 1 रंगों के स्थानीय विभाग में करीब 20 किलोमीटर की इसके कारण प्रदेश में काफी हुई 7 मीटर से 10 मीटर तक की उड़ती जवानी ए तरंगों ने तैयार खड़ी धान की फसल को बुरी तरह से नष्ट कर दिया । इस कारण कटिहार किसान एवं मजदूर आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो गए इस महा चक्रवात ने भुनेश्वर कटक के अलावा उड़ीसा के लगभग पूरे तथ्य पर देश को बर्बाद कर दिया।इस महा चक्रवात से करीब 130 लाख में प्रवाहित हो गए ।बड़ी संख्या में न सिर्फ पशुओं की मौत हुई बल्कि धान ,सब्जियों ,फलों के अलावा विभिन्न प्रकार की अन्य खड़ी फसलों को भी काफी नुकसान हुआ। मैनग्रोव के जंगल भी पारादीप एवं कोणार्क वाली जगह से लगभग लुप्त हो गए ।

            इस प्रकार के चक्रवात प्राकृतिक आपदा के रूप में आकार ना सिर्फ जान-माल की क्षति करते हैं ।बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति को भी काफी पीछे धकेल देते हैं जिससे उबरने में सरकार के अलावा नगरी को को भी विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

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